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an effort of popular Khortha monthaly magazine "LUATHI"

खोरठा की लोकप्रिय मासिक पत्रिका "लुआठी" का विनम्र प्रयास

 

बर्ष-2, अंक-1, सितम्बर-2010 (मासिक), दाम 10/- टाका

 

करम पोरबेक कइहनी

एगो राजाक रह-हलइ एगो छोट बहिन। बड़ी तड़क-भड़क आर साध-सोखेक उपर ओकर बीहा कइर देलइ। रजवें आपन बहिन के बड़ी दुलार करतलइ, सइले ओकर नामें पइर गेलइ दुलरी।

दिन काल बिततें दुलरिक ढेइरे छउआ-पूत जनमल्थिन। करें-करें दुलरिक उपर रजवोक टान कम भेले गेलइ आर दुलरी लइटके खाटीं सइट गेलिक। सेसें दुलरी मोरिए गेलिक।

दुलरिक मोरइथीं रजवा दोसर बीहा करेक उता-सूता करे लागल। खभइर पाइके दुलरिक भाएँ दोसर बिहा करे से माना कइर के पइउलइ। मेनेक रजवा साराक बात नाँइए मनलइ आर दोसर बिहा कइर लेल।

लउतन रानी थोरने दिनेक बाद आर आपन सइतिनेक गीदर के देखे नाँइ पारे लागलइ। सेसें उसब केमुँहं चेंथरा आर पोंरा-तोंरा ठुइस के उसब के मोराइ देलइन।

इसब बात जखन दुलरिक भोजी सुनलइ तखन आपन मरद से बादा करउलइ जे तकर (ऊ रनियाक) मोइर गेल्हुँ दोसर बिहा नाँइ करत। मउकाक बात। एक-दू बछर बादें रनिया (दुलरिक भोजी)ठीके मोइर गेलिक। दुवो बेटवइन टुवर भइ गेला।

एहोउ रजवा आपन मोरल बहुक बात नाइ मनलइ आर बीहा कइर लेलक। दिन-मइहना सिरइथीं लउतन रानीं असुकेक निंग्सा करइल।बड़का असुक, हाड़ मड़मड़ी रोग। रनिया आपन बिछनाक तरें सोनकापाटी राखाइ देलइ आर तबी ताने पाटाइल में ई कोरोअ ले ऊ कोंरोट घुइर जाइ। तखन सोनकापाटी करइ, ’पट-पट्, पट-पट्!’ लोकेक पतियार भइ जाइ जे खूब जबर रोग भेल हइ।

रजें कते बइद डकउलक। मेनेक बइद सब कोन्हों असुके नाँइ पावथ। रजवाक मनें बड़ी फिकिर ढुकलइ। तखन पटइले-पाटाइल रानीं रजवा के कहलइ जे जदि आपन दुवो गीदरवइन के पुइज देभीं तो हाम बेस भइ जीबउ। नापारक्खें हुकुम दइ देलइ।

मेनेक फुल तरी सुंदर दुवो गीदरवइन के पुजा दिए में बइद गुलइनेक मन आ काँचा भइ गेलइन। ओखिन दुइयो भाइ के भागाइ देल्थिन। उसभेक अउजी-पठरू काइट के सइ रकत टाआरकक्तें झोराबोर तलवाइर टा रानिक ठिनें पोंहचाइ देल्थिन।

हिन्दे दुवो गीद परइते गेला, आर परइते गेला। तब एगो अजगड़ बोने पोंहँइच गेला। तखन राइत भइ आइल हइ। अब काहाँ रहता ?

ताउले एगो झँपरा गाद देखे पइला। ऊ गछवा ठिने बड़ी बुगजुगनियों उड़-हल्थिन, से-ले तनी आलोउ मिल-लइन। दूइयो भाइ हूवें राइत काटला। ऊ गछवाक फेड़वें एगो जबर खोढ़रो हलइ। सइ खोढ़र टाञ दूयो भाइ के बेस रहे बन-हलइन।

तकर बादें दूइयो भाइ रोज ओहे करम खोढ़रें रहे लागला। बिहान भेलें रोज बोनवाक उपार बाटेक गाँवे मांगे-चाहेले जाथ आर संझियालीं घुइर आवथ।

एहे रकम दूवो भएक दिन बेसे बिते लागलइन। एक दिन एगो टंइगला पइला। सइ टंइगला लइ के दूइयो भाइ एक दिन करम कठवा के तनी फारल्थिन आर लइ गेला भीख मांगे डीहें।डीहेक लोक ऊ करम कठवाक बड़ी पसिंद करल्थिन । उसब केजान करम काठ तकर आगु नाँ देखल हला। हरदियार बरन चीकन-चीकन काठ देइख के बड़ी बेस लागलइन। आर दूवो भाइ के माइन -गइनो होेवे लागलइन।

अइसने समइ तनी बीच बाटेक एगो राइज ले हुँवाक राजाक खोजाइर करे ले लोक आइल हल्थिन। उसब कहल्थिन जे उसभेक राजा सिकार करेले बोने गेल हलइन सेआर घुरबे नाँइ करलइ। मइहना भेलइ, बछर भेलइ राजाक खोजाइरें। मल्किन निपता भेल राजाक आर बानार नाँइ मिललइ से नाँइए मिललइ। एखनो उसब रजवाक खोजाइरें घुरते हथ।

फइर उसब पुछल्थिन जे कोन्हों हेराइल-बँड़ुवाइल लोक के देखल हथ्नि ?

गाँवेक लोकें कहल्थिन जे दुगो हेराइल बँड़ुवाइल लोक तो पइत कँ ले घुरते-घारते आवथ। उसब बड़ी सुंदर आर चिकन-चिकन काठो आनथ बेचे ले। जकराँ करम काठ कहथिन।

राजाक खोजाइरें लागल लोक गुलइनों दुइयो भाइ के देखल्थिन। देखथीं उसब के पतियार भइ गेलइन जे उसब आपन राजाक पाइ गेल हथिन। दूइयो भाएक मइधें बड़का के मुठान टा हेराइल रजवा संग बहुत मेल खा-हलइ।

खोजवइया लोकवइन बड़ी माइन-गइन कइर के दूइयो भाइ केलअ जाइ लागल्थिन। एगो के राज मानल्थिन आर दोसर के तकर संगी।

दूवो भाइ कतनो कहथिन जे उसब नाँइ लागथिन उसब के राजा। मेंतुक खोजवइयाञ आर मानथ नाँइ।

सेसें दाएँ पोइर के बड़का भइवाक राजा बनेहे परलइ। आर दुवो भाइ गँवइयाक दरकार मोताबिक राइज करे लागला।

तकर बादें आपन राइजें करम मनवेक परथा चलाइ देला। करम पोरबें करम काठ-गाछ आर डाइर-ताइर के माइन-गइन करल जाइ लागलइ। करम गाछ तरें आर करम डाइर गाइड़ के आखड़ा बनाइ के करम गीत आर करम नाच होवे लागल। करम के संगे-संग बोने-पाथारें आने उपजवइया चीज के आँकुर करल जाइ लागल। से आँकुर गुला के जावा कहथिन। आर आँकुर गुला बोड़ होवेक तक रोज जावा गीत गावल जाइ। करमइती सब जावा गीत गावथ आर नाचथ।

मेंतुक ऊ डीहें करम कइहनी केउ नाँइ जान-हला। सइले छोटका भइये करम कइहनी पहिल दिन सुनलइन सब के--

एगो बड़का डीेहें रहे एगो राजा। तकर एगो बड़ी दुलरी बहिन रहइ। रजवें एगो दोसर रजवा संग ओकर बिहा कइर देलइ। दुलरिक ढेइरे छउआ-पूता। ....रानिक खुसिक ठेकान नाँइ। ऊ उइठ के कहलइ जे ओकर असुक साइर गेलइ।

हिन्दे दूवो आलाचार छउआ एगो अजगड़ बोने करम फेड़ेक खोढ़रें रहे लागला। दिनें पासेक डिहवइने भीख मांगतला आर बादें करम काठ बंेचतला। एहे रकमें करें-करें उसब बइन गेला नाम जइजका। बादें बड़का भइउवा राजा बनलक। ओखनिक संग बितल पूरा कइहनी सुनवल।

करम कइहनी सिराइल। पोरब निंछरलें खेतें-पाथारें, बारीं-झारीं आर टाँइर-टिकुरेक आबाद-ताबादें करम डाइर-होहरा-डोहंगा इसब गाड़ल जाइ लागल।

- डॉ0 ए0 के0 झा।

 

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