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an effort of popular Khortha monthaly magazine "LUATHI"

खोरठा की लोकप्रिय मासिक पत्रिका "लुआठी" का विनम्र प्रयास

 

बर्ष-2, अंक-1, सितम्बर-2010 (मासिक), दाम 10/- टाका

 

करम परबेक लहर

करम परब भादर महिनाक एकादसी (इंजरिया) के गोटे झारखंडें मनवल जाहे। करम परबेक लहर जावा उठवल सें सुरू हवे हे। करमेक नौ दिन आगु करमइति बेटी छउवा सब नदीं- जोरिया धारीं जाय किंबा बांधेक पिंड़े जाय बाँसेक डाली बा टूपा में बाली भइर खास कइर कुरथी बुनऽ हथ। कुरथीक संगें धान, बुट, जोउ हेन-तेनेक दानाउ बुनऽ हथ। जावा नोउ दिन छाड़ा केउ सात दिनेक बा पाँच दिनेको उठवऽ हथ।

जावा डाली उठवल सें करमेक लहर सुरू भइ जा हे। जावा के करमइति सब बड़ी नेम सें राखत खाँचीं ढाँइप एकर सें एक तो जावाक जतनों हवे आर ढाँपल सें जावा पियर-पियर उठे। सुरूजेक आहला पइलें जावाक पात हरिहर भइ जाय। हालांकी गीदर के डेरलवल जाइ जे साग खइलें जावा हरिहर हवे, मेंतुक अइसन कोन्हों बात नाय। करमइति सब बिहान-साँइझ से राइत नो-दस बजे तक एक ठीन सब जावा डाली राइख करम गीत गावथ आर नाच-कुद करथ। जे जघऽ जावा राइख नाचथ-खेलथ ओकराँ अखड़ा कहल जाय।

कुमार बेटी छउवा सब के तो हूब रहबे करइ, बिहवा बेटी छउवा सब करम पोरबें नइहर आवथ, खास कइर भाय बहिन के आने ससुराइर जाय। ई परब बेटी छउवाक नइहरेक परब लागइ आर आपन भायेक मंगल कामना कइर ई परब करथ से लेल जे बेटी छउवा कोन्हों कारनें बाप घर नाय आवथ तो मन छोट हवे आर ऊ सभो ससुर घारेक अखड़ें आपन ननंद गुलइन संगें करम गीत गावथ-नाचथ। अइसन समयें ननंद-भोजीं छेड़-छाड़ो हवइ जेटा कइयेक करम लोक गीतें पावल जाय। जे रंग- ’’बांका रे बांका कुरथी, भुंजे बइसल छोटकी ननंद, भुजइते-भुंजइते नुनु पोड़ी गेल, लाजेहूँ ना जाय ससुर घार।’’ ओइसने बिहवता बेटी छउवा आपन मरद सें ऊँच पिर्हा भाय के देय देखा ई लोकगीतवा,-’’ भइया हमर खायतइ पाकल पान रे, पाकल पान- संइया हमर खायतइ एंड़री के टूसा।’’

करमेक एक दिन आगु करमइति सब नाहाय-धोइ संजोत करथ, बुट, कुरथी, घांघरा, मुंग के चुकाँइ फुले लेथ। दोसर दिन ओकर डाली-टूपाँइ छाँइक आँकुर हवे देथ। साँइझ पहर भाइ सब करम डाइर काइट आनथ आर आखड़ा में गाड़थ जहाँ सब करमइति सब जुइट खीरा, आँकुर, आर घाँटरा पिठा दइ पूजा करथ। करम डाइरेक चाइरो धाइर जावा राइख झिका झोइर झुमइर चलइ। करम डाइर सब जघऽ नाय गाड़ाइ, उहाँ करमइति आपन आंगने में पूजा करे। अखड़ा में पूजाक समय करमा-धरमाक लोककथा कहेको रिवाज हे जे रंग सइतनारायन भगवानेक कथा। दोसर दिन भोरे उइठ जावाक चुमाइ भंसवे जाथ बांध बा नदीं। ओकर आगु जावाक कुछ पोहा उखाइड़ घर-बाड़ीक लतें-पातें छिंट देथ। ई रकम करम परबेक लहर हाफ्ता भइरेक लहर सिराय जाय आर बासी भात खाय बिहवा करमइति सब ससुर घर घुइर जाथ।

- मीरा जोगी

 

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