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an effort of popular Khortha monthaly magazine "LUATHI"

खोरठा की लोकप्रिय मासिक पत्रिका "लुआठी" का विनम्र प्रयास

 

बर्ष-2, अंक-1, सितम्बर-2010 (मासिक), दाम 10/- टाका

 

पढ़वइयाक मत

’लुआठी’ मार्च 2010 अंकें ’पढ़वइयाक मत’ मे जे एगो चिठी छापाइल हइ, से चिठी टाक लिखवइया ’कृष्ण मुरारी’ कहे खोज-हइ जे सीर्सक टा भासाक बिकास संगें जोरेक चाहि।बेसे बात! तो ऊ लेख टाइँ ई बात टाउ कहले गेले हइ, जे भासाक बिकासें संस्कीरतिक बिकास आर तकर से राजनीतिक चेतना। माने कि भासाक बिकास टा भेलइ कोनो छेतर के बिकासेक गोड़ा। तकरे दाएँ ऊ लेख टाइँ ई बिचार गुला घुरि-2 फुरछवल-फरनवल गेले हइ। भासाक जोरें एगो भिनु देस बने पारे, जेरंग बांगलादेश।

एहे सब भाभना-चिंताक आलोइँ कृष्ण मुरारिक बात गुलाक माने-मतलब टा झापसा-झापसा रकम बुझा हइ। जे भासा-साहितेक बिकासेक इतिहास टाक उपर गउर करल आइल हइ, से ई रकम कहबे नाँइ करतइ। तबे पाछे मुरारी कहे खोजेहे ई आहना टाक पटतइरें जे हाम्हीं ई रकम काहे करलों। 1955 ईस्वी हिं दिल्ली से मांग करल गेल हलइ जे झारखंड राइजेक भिनु पहचान खातिर संजुक्त भासाक उपस्थिति देखवेक दरकार।
(1)तो तथाकथित बोड़ो-बोड़ो लोक सब 1955से 1976-77 तक झारखंडेक संजुक्त भासाक महजूद रहेक बात टा केउ साबित नाँइ करल्थि तो हामे किले करलों ? बोड़-बोड़ ऊँट बोहाइ गेला, गाधाइँ कहे कते पानीं।(2) हामर दोसर दोस ई हे- अंतर्राष्ट्रीय स्तर के बिज्ञानी, समाज बिज्ञानी मंच ’भारत विगियान महासम्मेलनें हाम्हीं खोरठा साहित झारखंडी भासा-संस्कीरतिक महत के किले उजागर करलों?(3)हामर जबर दोस एहटाउ कहल जाइ पारे जे खोरठा सहित गोटे छेतरीय भासाक बेयाकरन ’खोरठा सहित सदानिक बेयाकरन’ किले लिखलों? आर केउ नाँइ तो हाम्हीं किले इटा करलों ?(4)हामर सहित आन-आन संगठन कर्त्ता, भासा करमी सब एक मत भइके कोनो खोरठाक मंचें नोउ गो दीप बरवेक परथा किले सुरू करली? आन कोनो भासा मंच खातिर ई काम टा किले नाँइ छोड़लिअइ।

सेसें तथाकथित परेम (प्रेम) के दोहाइ दिएक लेताइरें चिठी लिखवइयाइँ कहल हइ जे हामे प्रेमेक निरादर करल हों। तो चिठी लिखवइयाक बुझेक चाहि जे तथाकथित परेमें दोहाइ दिअइया सभे पइत बछर गइपरता पाँच लाख बेटी छउआगुला के चाहे तो मोराइ छोड़-हथिन बा मोरेले बाइध कर-हथिन। सइए ले सुधे बीसवीं सदीए में भारतें बेटी छउआक गनती टा बेटा छउआक गनती ले पाँच करोड़ कम भइ चुकल हइ। सोउ बछरें पाँच करोड़ के मोरोन। माने बछरी गड़परता पाँच लाखेक मोरोन! परेम आर धरम के दोहाइ दइ पवित्र हल्या।

तो सइये झारखंडेक आपन पुरना संस्कीरति के बेस मानल गेले हइ, जकर मंे तथाकथित परेमेक संगी ’सोलह श्रृंगार’ हेन-तेनेक परेम रस के ’रस राज श्रृंगार’ तो नाँइ कहलइ बिचकुन तकराँ काँचा रस कहल जाइक, जे में बिलासिता के संस्कीरति वाला देहिक सिंगार के आर तथाकथित परेम के बढ़ावा नाँइ मिलतइ मेनेक आयाँ मानवबादी सोहार्द बाढ़तइ, बिलासिता आर आडंबरेक बदल करमठता आर ’यथार्थता’ जागतइ। जे रकम आगुवो करमठता जागल आइल हइ। तभीं ना छोउ-सात हाजार बछर आगुक जगतेक सेरा ऊँच पिर्हवा सइभता-संस्कीरतिक महान बिकास जे करमठ लोक गुलइनेें सिंधु सइभताक नामें करल हल्थिन- ओखनिक मइधें झारखंडी लोकेक पुरख गुलाउ सामिल रह-हलथ।

तो झुठा परमें नाँइ सही मानवबादी मान! ई हे सेरा मानवबादी परथाक पहचान, ई हे करमठताक साटपेक काम! तो छुटल-फुचकल भासा जागरनेक काम गुला पहिल-पहिल करेक दोस टा के फइर गइछ के हामे आपने जबाब टा एखन एतने मे पुरव-हियो- दरकार भेलें आरो-आरो बादें।

आर एगो बात, चिठी लिखवइया टाँइ आरो कहल हइ जे झारखंडेक बिकास देखवेक लेताइरें हामेे गीत-संगीतेक जोगदान टाक चरचा किले नाँइ करलिअइ। तो ऊ लेख/भासन टाक उपर गउर करे गेल्हीं पता चलतो जे उटाइँ बिसेस रूपें ओहे बात गुलाक देखवल गेले हइ, जेगुला छुटल-फुचकल बिसेस बात रह-हलइ, आम बात नाँइ। तकर छाड़ा खोरठा छेतरेक आपन ऊ काम गुलाको कुछ चरचा हइ जे गुला नावाँ काम होवेक संगे-संग सबले आगु बाइढ़ के करल गेल हइ। आर जे गुलइन देखाइ के अजगुत प्रेरणा(हुब) जगवल जाइ पारे।

-डॉ0 ए0 के0 झा
मउसम विज्ञानी, खगोल बिदियाइँ-महादेशोत्तम(एसियन कांफ्रेंस),शत्ताब्दी रत्न, राष्ट्रभाषा रत्न, रिसर्च बोर्ड एड्वइजर-ए0बी0आई0,यू0एस0ए0,युनिवर्सिटी रिसोर्स पर्सन।

 

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