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an effort of popular Khortha monthaly magazine "LUATHI"

खोरठा की लोकप्रिय मासिक पत्रिका "लुआठी" का विनम्र प्रयास

 

हामें तोरा हांकाय रहल हियो

- वंदना टेटे


झारखंडियों के लिए यह नवगठित राज्य अब एक खामोश श्मशान बन गया है। मौत भूख से हो, बीमारी से हो या फिर हिंसा से, सरकार और समाज में कहीं कोई प्रतिक्रिया नहीं होती। एक ‘कायर’, ‘असंवेदनशील’ और ‘अमानवीय’ ठंडी खामोशी हर ओर छायी है। ऐसे में खोरठांचल की एक सरल, सशक्त आवाज के दम टूटने की खबर किसी को नहीं है, तो क्या आश्चर्य है! झारखंड आंदोलन में आदिवासी-सदान एकता को झामुमो के रूप में व्यवाहारिक राजनीतिक रूप देने वाले विनोद बिहारी महतो तथा हिन्दी एवं खोरठा के सर्वाधिक लोकप्रिय जनकवि श्रीनिवास पानुरी के परमसखा, झारखंड के राजनीतिक-सांस्कृतिक आंदोलन की एक मुख्य कड़ी - कैलाश महतो ‘व्यथित’ 1 अक्तूबर 2008 की रात नहीं रहे। करीब पाँच दशकों तक जिनकी धारदार आवाज राजनीतिक एवं सांस्कृतिक मंचों पर गूंजती रही, उसकी मृत्यु की खबर बेआवाज रही। जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन झारखंडी अस्मिता और पहचान के संघर्ष तथा सृजन में खर्च कर दिया, उस अभिभावक का साया ‘असंवेदनशीलता’ के साये में खो गया। परंतु, उनकी दमदार आवाज अब भी ‘कायर’ खामोशी को चीर रही है -

हामर संगे आव तनी, हामें तोरा हांकाय रहल हियो
बोझा टा उठाव तनी, हामें तोरा हांकाय रहल हियो

देखीं मानवता सिसक-हइ, आँखियो डबडबाइल हइ
देखीं मानुसेक अनतर, बेथा से बेथाइल हइ
चित्कार सुनेल आव तनी, हामें तोरा हांकाय रहल हियो
बोझा टा उठाव तनी, हामें तोरा हांकाय रहल हियो

अगियान लागइ बड़ा सतरु, ओकराहीं मारेक हइ
पसरल हइ आँधर जहाँ, दीया टा बारेक हइ
माचिस टा सुलगाव तनी, हामें तोरा हांकाय रहल हियो
बोझा टा उठाव तनी, हामें तोरा हांकाय रहल हियो

75 वर्षीय व्यथित जी का जन्म 7 जुलाई 1933 को धनबाद के धोबनी (मुनीडीह) में हुआ था। उनके पिता का नाम स्व. महेश्वर महतो तथा माता का शशि देवी था। सन् 1949 में डीएवी स्कूल, झरिया से मैट्रिक एवं बीके राय कॉलेज कतरासगढ़ से आइए की पढ़ाई पूरी की। छात्रावास में विनोद बाबू एवं व्यथित साथ-साथ रहे। सन् 1957 में उन्होंने राँची कॉलेज, राँची से स्नातक किया तथा 1963 में देवघर से बीएड/ स्नातक करने के बाद सन् 1957 में ही व्यथित जी ने सहायक शिक्षक के रूप में पुटकी उच्च विद्यालय में अपना योगदान दिया तथा स्कूल निर्माण में संस्थापक स्व. नगेन्द्र नाथ ओझा केे मुख्य सहयोगी बने। धोबनी प्राथमिक बालिका विद्यालय की स्थापना भी उनके प्रयास से हुई। जिसके लिए उन्हांेने अपनी एक बीघा जमीन तत्कालीन गवर्नर के नाम रजिस्ट्री कर दी थी। उनका विवाह 1955 में पुरुलिया निवासी अधिवक्ता खुदीराम महतो की सुपुत्री गौरी देवी केे साथ हुआ। खुदीराम महतो मानभूम के सांसद एवं भारतीय संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य थे। इस तरह व्यथित जी का परिवार सामाजिक-राजनीतिक रूप से सचेत था। इसके बावजूद वे मृदुभाषी, शालीन एवं संवेदनशील हृदय वाले व्यक्ति थे। समाज के उत्पीड़ित और वंचित समुदाय की मदद के लिए हर वक्त तैयार। झारखंडी भाषाओं के सम्मान, अपनी मातृभाषा खोरठा की सेवा तथा शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए जनमानस को जगाने का जो कार्य उन्हांेने किया है, उसे झारखंडी अवाम कभी नहीं भूला सकती।

खोरठांचल क्षेत्र में शिक्षा के विस्तार में व्यथित जी का योगदान अप्रतिम है। उनके ही सक्रिय रचनात्मक प्रयासों के कारण फागू महतो उच्च विद्यालय, कपुरिया एवं शहीद शक्तिनाथ महाविद्यालय, सिजुआ की स्थापना हो सकी। उन्होंने क्षेत्र में घूम-घूमकर शिक्षा का अलख जगाया तथा छात्रों को हर संभव मदद पहुंचाया। अपने अध्यापन काल में वे अंग्रेजी का क्लास लिया करते थे, तथापि इनकी पकड़ हिन्दी एवं खोरठा में समान रूप से रही। यही कारण है कि जहां उन्होंने अंग्रेजी की दर्जनों कविताएं लिखी हैं, वहीं हिन्दी और खोरठा लेखन में भी उनकी सृजन प्रतिभा का जवाब नहीं। उन्होंने लगभग ढाई सौ से अधिक कविताओं एवं गीतों की रचना की है। ये सारी रचनाएँ अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो बिखरी हुई हैं। प्रकाशित संग्रह सिर्फ एक है - ‘सालुक फूल’। इसका प्रकाशन 2006 में हुआ था। ‘सालुक फूल’ की सभी कविताएं अंतर्मन को छूती हैं। जड़ता को झकझोरती है तथा मानवता के तिमिर पथ को आलोकित करती है। इनके खोरठा लेख एवं कविताएं झारखंड अधिविद्य परिषद द्वारा वर्ग नवम् एवं दशम् के अध्ययापन हेतु प्रस्तावित है। अभिज्ञान शाकुन्तलम् (खोरठा अनुवाद) के साथ ही आपके खोरठा गीतों का ऑडियो कैसेट - फरीछ डहर (2007) भी निकल चुका है। ‘व्यथित’ जी ने खोरठा भाषा और साहित्य के संरक्षण तथा विकास के लिए ‘अखिल झारखंड खोरठा परिषद’ की स्थापना की थी जिसके वे उपाध्यक्ष एवं संरक्षक थे।

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अंकः 1, वर्षः 2, सितम्बर 2010

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Issue: 1, Volume: 2, September 2010

 

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खोरठा झारखंडेक गोटे उत्तरी छोटा नागपूर, संथाल परगना छाड़ा राँची, पलामुक हिस्सा में पसरल हे आर ई हिंयाक मूलवासी-आदीवासीक संपर्क भासा हे। एकर पढ़ाई एखन नवम कलास सें एम0 ए0 तक भइ रहल हे। एकर सें पी0 एच-डी0 डी0लीट्0 भइ रहल हे। एकर लइ जे0आर0एफ0 कइर रहल हथ।

 

झारखंडी भाषाओं मे से खोरठा ऐसी भाषा है जो समुद्र (फरक्का के पास) और दामोदर नदी से संबंध रखती है। साथ ही यही ऐसी अकेली झारखंडी भाषा है जिसका भाषा क्षेत्र विदेश (बंगला देश) से संबद्ध है।

 

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