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an effort of popular Khortha monthaly magazine "LUATHI"

खोरठा की लोकप्रिय मासिक पत्रिका "लुआठी" का विनम्र प्रयास

 

खोरठाक साहितकार-1

(खोरठाक एखनेक साहितकारेक खाँट-खूँट परिचयेक लेताइरें उपरेक दूवो झनेक नाम छाड़ा टाउ मोसकिल लागल काहे जे ई सभेक एतना परभाउ खोरठा जगतें हे जे ई सब कधियो पूरना नाय हता।-संपादक)

डॉ0 ए0 के0 झा
खोरठा साहितेक डँड़वे में डा0 ए0 के0 झा जीक सबले बेसी जोगदान हे। ई खोरठा भासा आर साहित आंदोलन के अगुवा रूपें जानल जा हथ। खोरठा साहितेक प्राइ सब बिधाँइ ई रचना करला। इनखर छपल खोरठा किताब हे-खोरठा काठें गइदेक खँड़ी’, खोरठा काठें पइदेक खँड़ी’, समाजेक सरजुइत निसइन (खंड काइब), कविता पूरान (बाल कविता), मेकामेकी ने मेटमाट (नाटक), खोरठा सहित सदानी बेयाकरन आर सकारन रामायन एकर छाड़ा डॉ चतुर्भूज साहू संग खोरठा छंद रस अलंकार आर निबंधेक किताब ’खोरठा सहित सदानी विभिन्न पहलुओ पर विचार’ छपल हे। हिन्दी किताब ’कवितायें कल और आज की’ गनेक जुकुर हे। इनखर खोरठा उपनियास ’सइर सगरठ’ प्रेसे हे। इनखर खोरठा भाषा विज्ञान आर शब्द कोश छपेक आसाँइ हे। डॉ0 ए0 के0 झा जी 1995 सें लगाइत खोरठा साहित्य संस्कृति परिषद् के निदेशक रूपें खोरठा भासा -साहित आंदोलन के अगुवाइ कइर रहल हथ। ई पहिल बेर झारखंडी भासाक आंतरिक एकरूपताक खोज करला आर ’खोरठा सहित सदानी बेयाकरन’ लिखला। ई एगो बेस मोउसम बिगियानीयो लागथ।

शिवनाथ प्रमाणिक
श्रीनिवास पानुरी आर ए0के0 झा जीक बाद सबले बेसी चहूँदिक प्रयास हे तो प्रमाणिक जी के। ई एक संगें कवि, गायक, प्रभावशाली वक्ता आर बेस संगठन कर्ता रूपें खोरठा जगतें पहिल पाँताइ आपन थान बनवल हथ। इनखर छपल किताब हे- ’रूसल पुटुस’ (संपादित खोरठा कविता संकलन), ’दामुदरेक कोराञ’, तातल हेमाल (एकल खोरठा काव्य संग्रह), खोरठा लोक साहित्य (हिन्दी एवं खोरठा में)। झारखंड सरकार बाट ले इनखां दू-दू बइर सम्मानित करल गेल हइ।

Current Cover

अंकः 1, वर्षः 2, सितम्बर 2010

Latest issue of LUATHI

Issue: 1, Volume: 2, September 2010

 

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खोरठा झारखंडेक गोटे उत्तरी छोटा नागपूर, संथाल परगना छाड़ा राँची, पलामुक हिस्सा में पसरल हे आर ई हिंयाक मूलवासी-आदीवासीक संपर्क भासा हे। एकर पढ़ाई एखन नवम कलास सें एम0 ए0 तक भइ रहल हे। एकर सें पी0 एच-डी0 डी0लीट्0 भइ रहल हे। एकर लइ जे0आर0एफ0 कइर रहल हथ।

 

झारखंडी भाषाओं मे से खोरठा ऐसी भाषा है जो समुद्र (फरक्का के पास) और दामोदर नदी से संबंध रखती है। साथ ही यही ऐसी अकेली झारखंडी भाषा है जिसका भाषा क्षेत्र विदेश (बंगला देश) से संबद्ध है।

 

आप सबसे एक अनुरोध

खोरठा डॉट इन 'लुआठी' पत्रिका का एक विनम्र प्रयास है। इस प्रयास को झारखंडी समुदायों, विशेषकर खोरठा भाषा-भाषी समुदाय के सक्रिय सहयोग और समर्थन की आवश्यकता है। खोरठा की एकमात्र नियमित पत्रिका ‘लुआठी’ महज पत्रिका नहीं है बल्कि यह झारखंड के खोरठा भाषा-साहित्य की प्रतिनिधि सांस्कृतिक पत्रिका है। आपसे आग्रह है, इस प्रयास को आगे बढ़ाइए। अपने विचारों, सुझावों ओर प्रतिक्रियाओं से हमें luathi@khortha.in पर जरूर अवगत कराइए।