| KHORTHA.IN | a web portal for Khortha language and literature

an effort of popular Khortha monthaly magazine "LUATHI"

खोरठा की लोकप्रिय मासिक पत्रिका "लुआठी" का विनम्र प्रयास

 

खोरठाक साहितकार-2

सुकुमार
एक संगें नाटक, कविता आर गीत रचनाक संगंे सुकुमार जी खोरठाक लोक गायक रूपें जानल जा हथ । छपल किताब हे- डाह (खोरठा नाटक), पइन सोखा (खोरठा गीत), झिंगुर,सेंवाति (संपादित खोरठा गीत), बावाँ हाथेक रतन (अम्बेदकर उपर खंड काव्य), मदन-भेड़ी ( खोरठा गीत संकलन)। पिरित के मरम, पिया रसिकवा आर फरीछ डहर (खोरठा गीतों का ऑडियो कैसेट/सीडी। हरिश्चन्द्र तारामती, ज्वाला दहेज की, दो भाई, सिकन्दरे आजम (सभी हिन्दी नाटक), लालचंद चरित-मानस (हिन्दी लघु जीवनी काव्य)। झारखंड सरकार के खेलकुद संस्कृति विभाग बाट ले 15 अगस्त 2007 के मुख्य मंतरी मधु कोड़ा इनखां ’सांस्कृतिक सम्मान’ देला।

श्याम सुन्दर महतो ’श्याम’
खोरठा कवि तो ढेर भेला मेंतुक गनल गुथल कइयेंक कवियेक नाम लियेक जुकुर हे जकर कविता एक टक-टकी लगाय लोक सुनथ । ओइसने लोकप्रिय कवि रूपें आपन थान बनवल हथ कवि श्याम सुंदर महतो ’श्याम’ जी। इनखर छपल खोरठा रचना में मुक्तिक डहर (खोरठा प्रबंध काव्य), तोञ आर हाम (एकल खोरठा संकलन), चेड़राक मुड़े बेल (खोरठा काव्य), खोरठा लोक गीत, साँचा (खोरठा बाल कविता)।
हिन्दुस्तान (हिन्दी दैनिक) के धनबाद संस्करण में ’हांकाय रहल हियो भाय’ साप्ताहिक खोरठा स्तंभ ढेर दिन छपल। एखन ई झारखंडी भासा-संस्कीरति करमी सभेक साझा मंच ’झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा’ के अध्यक्ष लागथ।

विश्वनाथ प्रसाद नागर
खोरठा शिष्ट साहित के पूरोधा श्रीनिवास पानुरी जीक संगें जे कुछ सहयोगी सबके नाम लेल जाहे तकर मइधें विश्वनाथ नागर जीक नाम आगु गनल जा हे जे 1960 आर 70 के दसके खोरठा साहित लेखने अगुवइला। इनखर छपल किताब हे ’रांगा लाठी (़कविता संगरह), ’खय्याम तोर मधुर गीत’ (उमर खयाम के 75 रूबाई के खोरठा काव्यानुबाद ) आर ’सुलक साय’ (खंड काव्य)।

डॉ0 बी0 एन0 ओहदार
आधुनिक खोरठा साहित के प्रचार - प्रसार आर सांगाठे मे डा0 बी0 एन0 ओहदार जीक महती जोगदान हे। ई खोरठाक बेस गइदकारेक संगें-संगें खोरठाक बेस बक्ताओ लागथ। ओहदार जीक खोरठा भासा आर साहित उपर बेस अध्ययन हे। ई एखन राँची विश्वविद्यालयेक ’जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा’ बिभागें खोरठाक प्राध्यापक हथ। इनखर छपल खोरठा किताब हे- ’खोरठा निबंध’, ’अनुदितांजलि’ (दुष्यन्त कुमार आर बहादूर षाह जफरेक गजलेक खोरठा अनुबाद), ’खोरठा भाषा एवं साहित्य-उद्भव और विकास’।

( निचु खोरठा रचनाकार के नाम आर ओकर खोरठें छपल किताब के नाम देखवल गेले हइ। खोरठा साहितकार के गोटइना जीवनी आर साहितिक जोगदान के जानकारी खातिर ’आकाष खूँटी’ लिखित किताब ’खोरठाक साहितकार’ पढ़ा।)

Current Cover

अंकः 1, वर्षः 2, सितम्बर 2010

Latest issue of LUATHI

Issue: 1, Volume: 2, September 2010

 

Check out the Promotions

खोरठा झारखंडेक गोटे उत्तरी छोटा नागपूर, संथाल परगना छाड़ा राँची, पलामुक हिस्सा में पसरल हे आर ई हिंयाक मूलवासी-आदीवासीक संपर्क भासा हे। एकर पढ़ाई एखन नवम कलास सें एम0 ए0 तक भइ रहल हे। एकर सें पी0 एच-डी0 डी0लीट्0 भइ रहल हे। एकर लइ जे0आर0एफ0 कइर रहल हथ।

 

झारखंडी भाषाओं मे से खोरठा ऐसी भाषा है जो समुद्र (फरक्का के पास) और दामोदर नदी से संबंध रखती है। साथ ही यही ऐसी अकेली झारखंडी भाषा है जिसका भाषा क्षेत्र विदेश (बंगला देश) से संबद्ध है।

 

आप सबसे एक अनुरोध

खोरठा डॉट इन 'लुआठी' पत्रिका का एक विनम्र प्रयास है। इस प्रयास को झारखंडी समुदायों, विशेषकर खोरठा भाषा-भाषी समुदाय के सक्रिय सहयोग और समर्थन की आवश्यकता है। खोरठा की एकमात्र नियमित पत्रिका ‘लुआठी’ महज पत्रिका नहीं है बल्कि यह झारखंड के खोरठा भाषा-साहित्य की प्रतिनिधि सांस्कृतिक पत्रिका है। आपसे आग्रह है, इस प्रयास को आगे बढ़ाइए। अपने विचारों, सुझावों ओर प्रतिक्रियाओं से हमें luathi@khortha.in पर जरूर अवगत कराइए।