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an effort of popular Khortha monthaly magazine "LUATHI"

खोरठा की लोकप्रिय मासिक पत्रिका "लुआठी" का विनम्र प्रयास

 

खोरठाक साहितकार-3

कृष्ण चंद्र दास ‘आला’
सँइतल साड़ा (खोरठा कविता), खरठा भाख गर्हन (खोरठा भाषा विज्ञान), खरठा बिधान (खोरठा व्याकरण), मंथन (हिन्दी काव्य), ललकार (हिन्दी लघुकथा संकलन), पंचशील (हिन्दी कहानी संकलन), झारखण्ड के दावेदार (हिन्दी लेख)

जनार्दन गोस्वामी ’ब्यथित’
माराफरी (खोरठा प्रबंध काव्य), सेंवातिक बूंद (खोरठा कविता संकलन), हिलोर (खोरठा गीत संकलन), चाँदिक जुता (खोरठा हास्य-व्यंग्य), खटरस (खोरठा कहानी संकलन), लोर (खोरठा कविता संकलन), ’उजरल खोंधा’ (बोकारोक बिस्थापेक कहनी) ’लुआठी’ में धारावाहिक छपल।

बंशी लाल ’बंशी’: ’डींड़ाक डोआनी’ (खोरठा प्रबंध काव्य), खोरठा दर्पण (खोरठा भाषा-संस्कृति की एक लघु परिचायिका)

मो॰ सिराजउद्दीन अंसारी ‘सिराज’: खोरठाक खूँटा तितकी राय (शोध परक जीवनी रचना सहित), रंगनि फुल (खोरठा कविता संकलन)

पंचम महतो: फरीछ डहर (खोरठा कहानी संगलन), मन चरयाँ (खोरठा जातरा बिरतांत)

अरविन्द कुमार: धुँगा (खोरठा कहनीक गोछ)

डॉ0 बिनोद कुमार: व्याख्याता-खोरठा अनुभाग, राँची कॉलेज- ’सोंध-माटी’ (खोरठा कहनी आर कबिता)

चितरंजन महतो ’चित्रा’- जिनगीक टोह (खोरठा उपन्यास), छाँहइर (खोरठा कहानी संकलन), लोकगाथा माहराइ के संकलन।

राम शरण विश्वकर्मा: मुरगा छाप फटक्का (खोरठा हास्य काव्य संकलन)

मणि लाल ’मणि’ : ईषावास्योपनिशद् (खोरठानुवाद)

मनमोहन पाठक: खोरठा गीतांजलि (रविन्द्र नाथ के गीतांजलि का खोरठानुवाद), भगवद्गीता का खोरठानुवाद धारावाहिक ’चमकता आईना’ (दैनिक अखबार, धनबाद)मे प्रकाशित

शिवनंदन पाण्डेय ’गरीब’, - खोरठा लोकगीत (एकल गीत संकलन),

श्याम सुन्दर केवट ’रवि’, बिसेस प्रतिनिधि ’लुआठी’, छपल किताब-खोरठा भूँइ पाठ गियान, करमइति (करमा लोकगीतो का संपादित संकलन), छउवा गीत, पिया भेल डूमइर के फुल (एकल खोरठा गीत संकलन)

मनपुरन गोस्वामी: महुआ (खोरठा गीत),भगत आर भजन (गिति नाट्य), खोरठा देस भगती गीत। आपन मंगल, परासचित, बड़की माय आर मारूति (सब खोरठा नाटक)

बासु बिहारी: कोरया फूल (खोरठा गीत),

इमतियाज गदर: पारसनाथ (खोरठा उपन्यास), ’सुरमनि (खोरठा कहनीक गोछ)

शांति भारत: सह संपादक-’तितकी’ (अनियतकालिन खोरठा पतरिका), छपल किताब- ’बेलंदरी’ (खोरठा गीतेक संपादित पुस्तक)

Current Cover

अंकः 1, वर्षः 2, सितम्बर 2010

Latest issue of LUATHI

Issue: 1, Volume: 2, September 2010

 

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खोरठा झारखंडेक गोटे उत्तरी छोटा नागपूर, संथाल परगना छाड़ा राँची, पलामुक हिस्सा में पसरल हे आर ई हिंयाक मूलवासी-आदीवासीक संपर्क भासा हे। एकर पढ़ाई एखन नवम कलास सें एम0 ए0 तक भइ रहल हे। एकर सें पी0 एच-डी0 डी0लीट्0 भइ रहल हे। एकर लइ जे0आर0एफ0 कइर रहल हथ।

 

झारखंडी भाषाओं मे से खोरठा ऐसी भाषा है जो समुद्र (फरक्का के पास) और दामोदर नदी से संबंध रखती है। साथ ही यही ऐसी अकेली झारखंडी भाषा है जिसका भाषा क्षेत्र विदेश (बंगला देश) से संबद्ध है।

 

आप सबसे एक अनुरोध

खोरठा डॉट इन 'लुआठी' पत्रिका का एक विनम्र प्रयास है। इस प्रयास को झारखंडी समुदायों, विशेषकर खोरठा भाषा-भाषी समुदाय के सक्रिय सहयोग और समर्थन की आवश्यकता है। खोरठा की एकमात्र नियमित पत्रिका ‘लुआठी’ महज पत्रिका नहीं है बल्कि यह झारखंड के खोरठा भाषा-साहित्य की प्रतिनिधि सांस्कृतिक पत्रिका है। आपसे आग्रह है, इस प्रयास को आगे बढ़ाइए। अपने विचारों, सुझावों ओर प्रतिक्रियाओं से हमें luathi@khortha.in पर जरूर अवगत कराइए।