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an effort of popular Khortha monthaly magazine "LUATHI"

खोरठा की लोकप्रिय मासिक पत्रिका "लुआठी" का विनम्र प्रयास

 

खोरठाक साहितकार-4

डॉ0 नागेश्वर महता: खोरठा लिपिक गढ़वइया, छपल किताब- ’खोरठा भाषा ज्ञान’।

धनपत महतो: कादो फूल (खोरठा कविता), धरतीक देवता बिरसा भगवान(खोरठा प्रबंध काव्य)

संतोश कुमार महतो: एक मउनी फूल (खोरठा एकल कविता संकलन), एक पथिया डोंगल महुआ (संपादित खोरठा कविता संकलन)

फुलचन्द महतो: ’भिस्मेक सत’ (खोरठा प्रबंध काव्य)

परितोश कुमार प्रजापति: ’जिनगिक भेउ’ (खोरठा काव्य संकलन)

डॉ0 चतुर्भुज साहु: खोरठाक छपल किताब- ’खोरठा सहित सदानी विभिन्न पहलुओं पर बिचार’ आर ’खोरठा छंद रस अलंकार’ मे ए0के0 झा के सह लेखक।

पारस नाथ महतो: खोरठा प़ित्रका ’करील’ के संपादक, छपल किताब- ’कें तोञ’ (खोरठा कबिता)

अनिल कुमार गोस्वामी ’बिस्थापित’: संपादक-’सहिया’ (खोरठा दूमहिनवाँ पतरिका), ’रंगइनी’ (गाछ-पालहाक संग जान चिनहाप)

घनश्याम महतो: ’झिंगा-फुल’ (खोरठा गीत)।

महेन्द्र ’प्रबुद्ध’: संपादक -परास फुल (खोरठा अनियतकालिन पतरिका) परास के फुल (खोरठा कबिता/गीत), तीन काट धान’ (खोरठा नाटक), ’चन्दुलाल चोकीदार’ (खोरठा नाटक), लाल बुझक्कड ़(खोरठा लोक कथा) एवं कई हिन्दी पुस्तकें।

मोमेरा बेगम: ’दीनेक दीया’ (खोरठा नात)

बासुदेव महतो: खोरठा व्याकरण कर एक खोमचा, खोरठा व्याकरणेक दमराही।

रमणिका गुप्ता: संपादिका-’युद्धरत आम आदमी’ (हिन्दी मासिक), खोरठा किताब-’बोनेक बोल’ (संपादित खोरठा कविताक पुस्तक)

डॉ0 डी0 सी0 राम: करम परब , चिंतन, ढरकल लोर (खोरठा कहनीक गोछ), चिनगारी (खोरठा कविताक गोछ)

शेखर गँवार: ’जयदेव झुमैर’ (गीत गोविन्द’ केर खोरठा झुमइरानुबाद)

जयत जयकर: पूरखा के गाँव (खोरठा कविता सकलन)

गीता वर्मा: ’हमर मनेक बात’ (खोरठा कविता संकलन)

गिरिधारी गोस्वामी ’आकाश खूँटी’: संपादक-’लुआठी’ (खोरठा मासिक), चेठा (खोरठा लघुकथा संगरह)।

आबा अइसन खोरठा रचनाकार सभेक नाम जाना जेकर जदियो कोन्हों किताब नाय छपल हे मेनेक खोरठा साहित जगतें आपन पहचान हे। ओइसन रचनाकारेक मइधें -

प्रदीप कुमार ’दीपक’, प्रो0 दिनेश ’दिनमणि’, अर्जुन पानुरी, प्रो0 भुवनेश्वर साहु, बहादुर पाण्डेय ’झिंगफूलिया’, महेन्द्र नाथ गोस्वामी ’सुधाकर’, गोबिन्द महतो ’जंगली’, सचिन कुमार महतो, शंकर गोस्वामी, दर्शन प्रसाद सिंह, प्यारे हुसैन ’प्यारे’, भारत यायावर, प्रह्लाद चन्द्र दास, प्रो0 कुमारी शशि, गीता रानी, प्रो0 नागेश्वर महतो, अकलु राम महतो, राधेश्याम साहू, अर्चना कुमारी, लखु चंद्र महतो, हेन-तेन।

Current Cover

अंकः 1, वर्षः 2, सितम्बर 2010

Latest issue of LUATHI

Issue: 1, Volume: 2, September 2010

 

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खोरठा झारखंडेक गोटे उत्तरी छोटा नागपूर, संथाल परगना छाड़ा राँची, पलामुक हिस्सा में पसरल हे आर ई हिंयाक मूलवासी-आदीवासीक संपर्क भासा हे। एकर पढ़ाई एखन नवम कलास सें एम0 ए0 तक भइ रहल हे। एकर सें पी0 एच-डी0 डी0लीट्0 भइ रहल हे। एकर लइ जे0आर0एफ0 कइर रहल हथ।

 

झारखंडी भाषाओं मे से खोरठा ऐसी भाषा है जो समुद्र (फरक्का के पास) और दामोदर नदी से संबंध रखती है। साथ ही यही ऐसी अकेली झारखंडी भाषा है जिसका भाषा क्षेत्र विदेश (बंगला देश) से संबद्ध है।

 

आप सबसे एक अनुरोध

खोरठा डॉट इन 'लुआठी' पत्रिका का एक विनम्र प्रयास है। इस प्रयास को झारखंडी समुदायों, विशेषकर खोरठा भाषा-भाषी समुदाय के सक्रिय सहयोग और समर्थन की आवश्यकता है। खोरठा की एकमात्र नियमित पत्रिका ‘लुआठी’ महज पत्रिका नहीं है बल्कि यह झारखंड के खोरठा भाषा-साहित्य की प्रतिनिधि सांस्कृतिक पत्रिका है। आपसे आग्रह है, इस प्रयास को आगे बढ़ाइए। अपने विचारों, सुझावों ओर प्रतिक्रियाओं से हमें luathi@khortha.in पर जरूर अवगत कराइए।