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an effort of popular Khortha monthaly magazine "LUATHI"

खोरठा की लोकप्रिय मासिक पत्रिका "लुआठी" का विनम्र प्रयास

 

खोरठा साहित पुरोधा श्रीनिवास पानुरी

खोरठा भासाँइ गीत झुमइर सें उपर उइठ ’शिष्ट साहित्य’ के बेबस्थित रचना कइर खोरठा भासा साहितेक डँड़वे वाला जते जइ लोक भेला, श्रीनिवास पानुरी जीक नाम सबले उपर लेल जाहे। जोदि पानुरी जीक खोरठा ’शिष्ट’ साहितेक जनक कहल जाय तो बेजाँइ नाय।

विश्वनाथ दसौंधि ’राज’

खोरठा शिष्ट साहित कें स्थापित करे में जे सब साहितकार सब भागिरथ प्रयास करल हथ ओकर में श्री विश्वनाथ दसौंधी ‘राज’ जीक नाम पहिल पाँताइ लियेक जूकूर हे।

खोरठाक साहितकार-1

खोरठा साहितेक डँड़वे में डा0 ए0 के0 झा जीक सबले बेसी जोगदान हे। ई खोरठा भासा आर साहित आंदोलन के अगुवा रूपें जानल जा हथ।

खोरठाक साहितकार-2

सुकुमार
एक संगें नाटक, कविता आर गीत रचनाक संगंे सुकुमार जी खोरठाक लोक गायक रूपें जानल जा हथ । छपल किताब हे- डाह (खोरठा नाटक), पइन सोखा (खोरठा गीत), झिंगुर,सेंवाति (संपादित खोरठा गीत), बावाँ हाथेक रतन (अम्बेदकर उपर खंड काव्य), मदन-भेड़ी ( खोरठा गीत संकलन)।

खोरठाक साहितकार-3

कृष्ण चंद्र दास ‘आला’
सँइतल साड़ा (खोरठा कविता), खरठा भाख गर्हन (खोरठा भाषा विज्ञान), खरठा बिधान (खोरठा व्याकरण), मंथन (हिन्दी काव्य), ललकार (हिन्दी लघुकथा संकलन), पंचशील (हिन्दी कहानी संकलन), झारखण्ड के दावेदार (हिन्दी लेख)

खोरठाक साहितकार-4

डॉ0 नागेश्वर महता: खोरठा लिपिक गढ़वइया, छपल किताब- ’खोरठा भाषा ज्ञान’।

धनपत महतो: कादो फूल (खोरठा कविता), धरतीक देवता बिरसा भगवान(खोरठा प्रबंध काव्य)

कुछ हेराइल सिराइल रचनाकार

प्रो0 नरेश नीलकमल
श्रीनिवास पानुरी जीक सबले प्रिय सखा आर खोरठा साहितेक बिदवान, खोरठा बेयाकरण लिखला। ’खोरठा’ पखवारी के सह संपादक। ’करील’ (खोरठा कविता) उनखर संकलन।

Current Cover

अंकः 1, वर्षः 2, सितम्बर 2010

Latest issue of LUATHI

Issue: 1, Volume: 2, September 2010

 

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खोरठा झारखंडेक गोटे उत्तरी छोटा नागपूर, संथाल परगना छाड़ा राँची, पलामुक हिस्सा में पसरल हे आर ई हिंयाक मूलवासी-आदीवासीक संपर्क भासा हे। एकर पढ़ाई एखन नवम कलास सें एम0 ए0 तक भइ रहल हे। एकर सें पी0 एच-डी0 डी0लीट्0 भइ रहल हे। एकर लइ जे0आर0एफ0 कइर रहल हथ।

 

झारखंडी भाषाओं मे से खोरठा ऐसी भाषा है जो समुद्र (फरक्का के पास) और दामोदर नदी से संबंध रखती है। साथ ही यही ऐसी अकेली झारखंडी भाषा है जिसका भाषा क्षेत्र विदेश (बंगला देश) से संबद्ध है।

 

आप सबसे एक अनुरोध

खोरठा डॉट इन 'लुआठी' पत्रिका का एक विनम्र प्रयास है। इस प्रयास को झारखंडी समुदायों, विशेषकर खोरठा भाषा-भाषी समुदाय के सक्रिय सहयोग और समर्थन की आवश्यकता है। खोरठा की एकमात्र नियमित पत्रिका ‘लुआठी’ महज पत्रिका नहीं है बल्कि यह झारखंड के खोरठा भाषा-साहित्य की प्रतिनिधि सांस्कृतिक पत्रिका है। आपसे आग्रह है, इस प्रयास को आगे बढ़ाइए। अपने विचारों, सुझावों ओर प्रतिक्रियाओं से हमें luathi@khortha.in पर जरूर अवगत कराइए।