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खोरठा की लोकप्रिय मासिक पत्रिका "लुआठी" का विनम्र प्रयास

 

झारखण्ड लोक सेवा आयोग (जे0पी0एस0सी0) पाठ्यक्रम

झारखण्ड लोक सेवा आयोग (जे0पी0एस0सी0)
के मुख्य विषय में खोरठा भाषा-साहित्य का पाठ्यक्रम
SYLLABUS FOR MAIN EXAMINATION OF JPSC
(Sub. Code: 44 Khortha Language and Literature)

प्रथम पत्र (पूर्णांक- 200)
खण्ड ’क’ - खोरठा भाषा विज्ञान एवं व्याकरण
1 ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में खोरठा- उद्भव एवं विकास।
2 खोरठा आर्य परिवार और अनार्य परिवार की भाषाओं से संबंध एवं भिन्नता।
3 खोरठा की ध्वनियाँ-शब्द, पद, अर्थ, वाक्य विन्यास।
4 खोरठा की अपनी व्याकरणिक विशेषताएँ- संज्ञा, सर्वनाम, कारक।
5 खोरठा के विभिन्न क्षेत्रीय रूप एं मानकीकरण।
6 अपनी प्रतिवेषी भाषाओं पर खोरठा का प्रभाव-बंगला, उड़िया, मगही, एवं मैथिली।
7 खोरठा भाषा का महत्व तथा अध्ययन-अध्यापन की आवश्यकता।
8 खोरठा की लिपि समस्या और इसके समाधान।

खण्ड ’ख’ - खोरठा साहित्य
1 खोरठा साहित्य का काल विभाजन- प्राचीन, मध्य तथा आधुनिक।
2 खोरठा गद्य एवं पद्य का विकास।
3 झारखण्ड में भाषा आंदोलन और खोरठा।
4 खोरठा में राग, छन्द, अलंकार, रस की अपनी विशिष्टता।
5 खोरठा साहित्य का वर्त्तमान स्वरूप, प्रतृति एवं झारखण्ड की अन्य भाषाओं से तुलनात्मक संबंध।
6 खोरठा के विकास में पत्र-पत्रिकाओं, आकाशवाणी एवं दूरदर्शन का योगदान।

द्वितीय पत्र (पूर्णांक- 200)
खण्ड ’क’ खोरठा लोकसाहित्य- लोकगीत एवं लोककथा

(क) लोकगीत
1 खोरठा लोकगीतों की प्रतृत्तियाँ, विशेषतायें, महत्व एवं वर्गीकरण।
2 खोरठा लोकगीतों में झारखण्डी सांस्कृतिक चित्रण- प्रकृति, श्रृंगार, संस्कार, श्रम, ऋतु चित्रण, अन्य।
3 औद्यौगिकीकरण एवं खोरठा लोकगीत- सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्ष।

(ख) लोककथा
1 खोरठा लोककथा का महत्व एवं वर्गीकरण।
2 खोरठा प्रकीर्ण साहित्य- कहावतें, मुहावरे, लोकोक्तियाँ, पहेली, मंत्र।

खण्ड ’ख’: खोरठा शिष्ट साहित्य
1 खोरठा में कहानी, नाटक एवं उपन्यास का विकास।
2 खोरठा में संस्मरण एवं यात्रा वृत्तांत।
3 खोरठा में की गयी व्यंग्य रचना परंपरा।
4 खोरठा में आलोचना साहित्य का विकास।
5 खोरठा शब्द चित्रण।
6 खोरठा शिष्ट साहित्य के निमार्ण में विभिन्न साहित्यकारों का योगदान- प्राचीन कालीन, मध्यकालीन एवं आधुनिक काल के साहित्यकार। मुख्य रूप से- जीतुलाल शर्मा, श्याम सुन्दर महथा, भुवनेश्वर दत्त शर्मा ’व्याकुल’, तीजु महतो, श्रीनिवास पानुरी, ए0 के0 झा, विश्वनाथ नागर, विष्वनाथ दसौंधि ’राज’, शिवनाथ प्रमाणिक, फटिक चंद्र झा, बी0 एन0 ओहदार, बिनोद कुमार, पंचम महतो, सुकुमार, श्याम सुन्दर महतो।

7 सप्रसंग व्याख्या- गद्य एवं पद्य भाग से (अनिवार्य)

गद्य भाग
(क) खोरठा निबंध- प्रारंभ के दो निबंध (लेखक- बी0 एन0 ओहदार)
(ख) खोरठा काठें गइदेक खँड़ी- प्रारंभ के तीन निबंध (लेखक- ए0 के0 झा)
(ग) डाह (नाटक)- प्रथम अंक (नाटककार- सुकुमार)
(घ) जिनगीक टोह (उपन्यास)- अंतिम भाग (उपन्यासकार- चित्तरंजन महतो ’चित्रा’)
(ङ) सोंध माटी (विविध)- माइ के लोर, हुब, ओह दिदा, दु पइला जोंढ़रा। (लेखक- बिनोद कुमार)

पद्य भाग
(क) खोरठा काठें पइदेक खँड़ी- भारतेक मोहरा 1, 2, गोटा टाका, मोरेक लुइर, सवागत, राधाक मोहड़ा, मेढ़ ना मानुस, बजराक किरिया (कवि- ए0 के0 झा)
(ख) दामुदरेक कोराञ (खण्ड काव्य)- अंतिम भाग। (कवि- शिवनाथ प्रमाणिक)
(ग) एक मउनी फूल (कविता संग्रह)- प्रारंभ की पाँच कवितायें (कवि- संतोष कुमार महतो)
(घ) समाजेक सरजुइत निसइन (प्रबंध काव्य)- प्रथम भाग (कवि- ए0 के0 झा)

Current Cover

अंकः 1, वर्षः 2, सितम्बर 2010

Latest issue of LUATHI

Issue: 1, Volume: 2, September 2010

 

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खोरठा झारखंडेक गोटे उत्तरी छोटा नागपूर, संथाल परगना छाड़ा राँची, पलामुक हिस्सा में पसरल हे आर ई हिंयाक मूलवासी-आदीवासीक संपर्क भासा हे। एकर पढ़ाई एखन नवम कलास सें एम0 ए0 तक भइ रहल हे। एकर सें पी0 एच-डी0 डी0लीट्0 भइ रहल हे। एकर लइ जे0आर0एफ0 कइर रहल हथ।

 

झारखंडी भाषाओं मे से खोरठा ऐसी भाषा है जो समुद्र (फरक्का के पास) और दामोदर नदी से संबंध रखती है। साथ ही यही ऐसी अकेली झारखंडी भाषा है जिसका भाषा क्षेत्र विदेश (बंगला देश) से संबद्ध है।

 

 

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