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an effort of popular Khortha monthaly magazine "LUATHI"

खोरठा की लोकप्रिय मासिक पत्रिका "लुआठी" का विनम्र प्रयास

 

खोरठा के लिए खोरठा लिपि ही क्यों?

किसी भाषा की कतिपय अपनी विशिष्ट ध्वनियाँ होती हैं। उन विशिष्ट ध्वनियों को किसी अन्य भाषा के लिए प्रयुक्त लिपि में अंकित करना कठिन होता है। यानी उधार की लिपि में किसी भाषा के लेखन-पठन में मानकर चलने की विवशता आ जाती है।

खोरठा लिपि : एक परिचय

खोरठा की अपनी लिपि है जिसके अविष्कारक हैं डॉ. नागेश्वर महता।

खोरठा लिपि के लिए 'Anshu' फॉण्ट

डॉ0 नागेश्वर महतो द्वारा बनाई गई इस लिपि को 'Anshu' फॉण्ट के नाम से सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। इसे ’इंस्टॉल’ कर इसे नागरी फॉण्ट की तरह टाइप किया जा सकता है|

Current Cover

अंकः 1, वर्षः 2, सितम्बर 2010

Latest issue of LUATHI

Issue: 1, Volume: 2, September 2010

 

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खोरठा झारखंडेक गोटे उत्तरी छोटा नागपूर, संथाल परगना छाड़ा राँची, पलामुक हिस्सा में पसरल हे आर ई हिंयाक मूलवासी-आदीवासीक संपर्क भासा हे। एकर पढ़ाई एखन नवम कलास सें एम0 ए0 तक भइ रहल हे। एकर सें पी0 एच-डी0 डी0लीट्0 भइ रहल हे। एकर लइ जे0आर0एफ0 कइर रहल हथ।

 

झारखंडी भाषाओं मे से खोरठा ऐसी भाषा है जो समुद्र (फरक्का के पास) और दामोदर नदी से संबंध रखती है। साथ ही यही ऐसी अकेली झारखंडी भाषा है जिसका भाषा क्षेत्र विदेश (बंगला देश) से संबद्ध है।

 

 

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आप सबसे एक अनुरोध

खोरठा डॉट इन 'लुआठी' पत्रिका का एक विनम्र प्रयास है। इस प्रयास को झारखंडी समुदायों, विशेषकर खोरठा भाषा-भाषी समुदाय के सक्रिय सहयोग और समर्थन की आवश्यकता है। खोरठा की एकमात्र नियमित पत्रिका ‘लुआठी’ महज पत्रिका नहीं है बल्कि यह झारखंड के खोरठा भाषा-साहित्य की प्रतिनिधि सांस्कृतिक पत्रिका है। आपसे आग्रह है, इस प्रयास को आगे बढ़ाइए। अपने विचारों, सुझावों ओर प्रतिक्रियाओं से हमें luathi@khortha.in पर जरूर अवगत कराइए।