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an effort of popular Khortha monthaly magazine "LUATHI"

खोरठा की लोकप्रिय मासिक पत्रिका "लुआठी" का विनम्र प्रयास

 

एम0 ए0 (जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा) खोरठा - पाठ्यक्रम

अभी जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग राँची विश्वविद्यालय के अंतर्गत मुख्य रूप से पाँच जनजातीय( मुण्डारी, संथाली, हो, खड़िया और कुड़ुख) तथा चार क्षेत्रीय भाषाएँ (नागपुरी, कुरमाली, खोरठा और पंचपरगतियाँ) भाषा-साहित्य का अध्ययन-अध्यापन और अनुसंधान होता है। भाषा विशेष में अधिकार और गति के आधार पर अध्येता इनमे किसी एक भाषा-साहित्य को अपने अध्ययन का केन्द्र बनाता है।

जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग का पाठ्यक्रम आपाततः अन्तः विषयी, मिश्रित और उपयोगी-अभिमुख है। मगर इसमें जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा-साहित्य के अध्ययन की एक समग्र वैज्ञानिक दृष्टि भाी सन्निहित है। इस पाठ्यक्रम का केन्द्र पंचम एवं षष्ठ पत्र जिनके अन्तर्गत अध्येता अपनी भाषा के सम्पूर्ण पद्य एवं गद्य साहित्य का आलोचनात्मक अभिज्ञान प्राप्त करता है। शेष पत्र इसकी पीठिका एवं पूरक की तरह नियोजित है।

वस्तुतः साहित्यिक अध्ययन के चार प्रमुख अंगांें- जाति, भाषा, संदर्भ और सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए इस पाठ्यक्रम के प्रथम चार पत्र क्रमशः जातिविज्ञान, भाषाविज्ञान, भारतीय साहित्य और साहित्य सिद्धांत पंचम एवं षष्ठ पत्र की पीठिका के रूप में नियोजित है। प्रथम पत्र (जातिविज्ञान) इस क्षेत्र के विभिन्न जातियों के अध्ययन का आधर, तीसरा पत्र (भारतीय साहित्य) उनके लिए व्यापक संदर्भ प्रस्तुत करता है तो चौथा पत्र (साहित्य सिद्धांत) साहित्य के अध्ययन का सैद्धांतिक प्रतिमान। इस तरह प्रथम चार पत्रों के अभिज्ञान से अध्येता को अपनी भाषा और साहित्य के व्यापक विश्लेषण और मूल्यांकन का सुयोग प्राप्त हो सकेगा। पंचम एवं षष्ठ वर्ष में डिसर्टेशन के दो पत्र (रचनात्मक लेखन एवं लघु शोध प्रबंध) अध्येता के लिए पूरक की तरह एक और अध्ययन की प्रेरणा के स्त्रोत है तो दूसरी ओर उनके अध्ययन मनन की साकार परिणति और बहुमुल्य उपलब्धि भी। उससे विकासामान जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा साहित्य को तात्कालिक समृद्धि और गरिमा भी प्राप्त होती है।

संक्षिप्ततः अपनी भाषा, साहित्य और संस्कृति को जानने-समझने और उसके लिए कुछ करने के इच्छुक अध्येताओं को आधार भूत दृष्टि और दिशा देना इस पाठ्यक्रम का काम्य है। जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की एम0 ए0 पंचम एवं षष्ठ वर्ष की परीक्षा में आठ-आठ पत्र होंगे। प्रथम छः पत्रों की सामान्य लिखित पत्रों की सामान्य लिखित परीक्षाएँ होंगी जिनमें तीन-तीन घंटे का समय रहेगा अंन्तिम वर्ष के पंचम एवं षष्ठ सप्तम एवं अष्टम पत्र ऐच्छिक विशेष पत्र होंगे। विभिन्न पत्रों के विस्तृत विवरण इस प्रकार है-

पंचम वर्ष
प्रथम पत्र: जातिविज्ञान (Ethnology) पूर्णांक- 100, समय 3 घंटे
1 जातिविज्ञान की परिभाषा और स्वरूप 2 अध्ययन क्षेत्र 3 अध्ययन विधि 4 अध्ययन का उद्देश्य 5 मुख्य शाखाएँं 6 उपयोगिता और विशिष्ठ्य 7 अन्य विषयों से सम्बन्ध 8 आधुनिक प्रतृतियाँ 9 संस्कृति की अवधारणा और परिवर्तन 10 समाज-व्यवस्था 11 अर्थ-व्यवस्था 12 धार्मिक-व्यवस्था 13 जनजातीय एवं उनका विकास।
इस पत्र के प्रश्नों के उत्तर हिन्दी या अंग्रजी किसी एक मानक भाषा में अपेक्षित होंगे।

द्वितीय पत्र: भाषा विज्ञान (General Linguistic) पूर्णांक- 100, समय 3 घंटे
1 भाषा-विज्ञान की परिभाषा तथा इसके प्रकार 2 भाषा-विज्ञान के अध्ययन के विभाग 3 भाषा-विज्ञान की उपयोगिता 4 भाषा उत्पति के सिद्धांत 5 भाषा की विशेषताएँ और प्रकृति 6 भाषा का विकास (परिवर्तन) और उसके कारण 7 भाषा के विभिन्न रूप 8 भाषाओं का वर्गीकरण 9 ध्वनि-विज्ञान 10 रूप-विज्ञान 11 वाक्य-विज्ञान 12 अर्थ-विज्ञान 13 शैली-विज्ञान 14 अनुवाद-विज्ञान 15 लिपि- विज्ञान 16 कोश-विज्ञान।
इस पत्र के उत्तर हिन्दी या अंग्रेजी भाषा में अपेक्षित होंगे।

तृतीय पत्र: भारतीय साहित्य (Indian Literature) पूर्णांक- 100, समय 3 घंटे
1 प्राचीन भारतीय साहित्य का सामान्य परिचय- वेद, उपनिषद्, पुराण, महाकाव्य, तमिल महाकाव्य, जैन साहित्य, बौद्ध साहित्य अनय साहित्य।
2 मध्यकालीन भारतीय साहित्य का सामान्य परिचय
(क) मध्यकालीन काव्य की प्रमुख प्रवृतियाँ- भक्ति आन्दोलन, सगुण भक्ति, निर्गुण भक्ति, राम मार्गी, कृष्ण मार्गी, सूफीसन्त से सम्बन्धित साहित्य का विकास और प्रमुख कवि तथा काव्य, जैसे- सूर, तुलसी, कबीर, जायसी, और मीरा का काव्य साधना का परिचय।
(ख) रीतिकालीन काव्य की प्रमुख प्रवृतियाँ- रीतिकालीन कवि और काव्य का विकास और मुख्य कवि तथा काव्य जैसे- बिहारी, घनानन्द, भूषण आदि की काव्य साधना का परिचय।
इस पत्र के प्रश्नोत्तर हिन्दी या अंग्रेजी में अपेक्षित हांेंगे।

चतुर्थ पत्र: साहित्य सिद्धांत (Theory of Literature) पूर्णांक- 100, समय 3 घंटे
1 साहित्य के हेतु, तत्व, रूप, प्रक्रिया और प्रयोजन का अध्ययन (भारतीय एवं पाश्चात्य दृष्टिकोण)
2 साहित्यिकी विविध विधाओं- काव्य, उपन्यास, कहानी, नाटक, एकांकी, निबंध, और आलोचना के स्वरूप और रचना विधान का अध्ययन।
3 शब्द-शक्ति, रस-निरूपण, ध्वनि, गुण-दोष, छन्द और अलंकार-वृत्यानुप्रास, छेकानुप्रास, लाटानुप्रास, यमक, श्लेष, वक्रोक्ति, वीप्सा, उपमा, रूपक, भ्रांतिमान, संदेह, अपह्नुति, उत्प्रेक्षा, अतिश्योक्ति, दीपक, प्रतिवस्तुपमा, दृष्टांत, व्यतिरेक, समासोक्ति, परिकर, परिकरांकुर, व्याजस्तुति, विरोधाभास, विभावना, विशेषोक्ति, असंगति, काव्यलिंग, अर्थान्तरन्यास, यथासांख्य, प्रतीप, लोकोक्ति, और स्वाभावोक्ति। छन्द-दोहा, चौपाई, सोरठा, सवैया, अनुष्टुप, गायत्री, मालिनी, मदाकान्ता, द्रुतविलम्ति, वसन्ततिलका।
इस पत्र के उत्तर हिन्दी या अंग्रेजी में अपेक्षित होंगे।

पंचम पत्र: पद्य (Poetry) पूर्णांक- 100, समय 3 घंटे
अंक विभाजन
(अ) आलोचनात्म प्रश्न 3X20 त्र 60
(आ) व्याख्यात्मक प्रश्न 4X10 त्र 40
इस पत्र के उत्तर जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा में अपेक्षित होंगे।
1 खोरठा के प्राचीन कवि और काव्य - सं0 बी0एन0 ओहदार।
2 मेघदूत -श्रीनिवास पानुरी।
3 एक पथिया डोंगल महुआ -संतोष कुमार महतो
4 डिंड़ाक डोआनी - बंशी लाल ’बंशी’

षष्ठ पत्र: गद्य (Prose) पूर्णांक- 100, समय 3 घंटे
अंक विभाजन
अ) आलोचनात्म प्रश्न 3X20 त्र 60
(आ) व्याख्यात्मक प्रश्न 4X10 त्र 40
इस पत्र के उत्तर जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा में अपेक्षित होंगे।
1 जिनगीक टोह (उपन्यास)- चितरंजन महतो
2 उदवासल कर्न (नाटक)- श्रीनिवास पानुरी
3 खोरठा निबंध संग्रह - सं0- ए0 के0 झा, विनोद कुमार, एवं बी0 एन0 ओहदार
4 खोरठा निबंध - बी0 एन0 ओहदार

षष्ठ वर्ष
(पंचम वर्ष की विश्वविद्यालय वार्षिक परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थी ही षष्ठ वर्ष मे अध्ययन करेंगे।)

नवम पत्र: जाति विज्ञान (Ethnology) पूर्णांक- 100, समय 3 घंटे
जाति वैज्ञानिक अध्ययन- झारखण्ड एवं पार्श्व प्रदेश की आदिवासी एवं सदान जातियों की विभिन्न जातियों का अध्ययन-
अध्ययन विन्दु- जाति विशेष की उत्पति, प्रवर्जन, इतिहास, जनसंख्या, निवास स्थल, अर्थ-व्यवस्था, समाज-व्यवस्था, धार्मिक-जीवनचक्र, खान-पान, रहन-सहन, विचार-विश्वास, पव्र-त्योहार, वर्जनाएँ, कला- साधना, खेल-कूद, कानुन-व्यवस्था, विशिष्ट प्रवृत्तियाँ, परिवर्त्तन की दिशाएँ, औद्यौगीकरण, नगरीकरण, वैश्वीकरण, समस्याएँ, विकास तथा सम्भावनाएँ एवं झारखण्ड के स्वतंत्रता सेनानी (शहीद)।
इस पत्र के प्रश्नों के उत्तर हिन्दी या अंग्रजी किसी एक मानक भाषा में अपेक्षित होंगे।

दशम पत्र: भाषा विज्ञान (Linguistic lang. goup) पूर्णांक- 100, समय 3 घंटे
अपनी भाषा का वैज्ञानिक अध्ययन-
संताली, मुण्डारी, हो, खड़िया, कुड़ुख, नागपुरी, कुरमाली, खोरठा, और पंचपरगनिया भाषाओं में से किसी एक भाषा का भाषा वैज्ञानिक अध्ययन।
अध्ययन के मुख्य विन्दु- सामान्य परिचय, नामांकरण, उद्भव और विकास, जनसंख्या, प्रभेद, अध्ययन- परंपरा, ध्वनि, शब्द सम्पदा, वाक्य रचना, मुहावरे, विशिष्टताएँ, लिपि समस्याएँ एवं सम्भावनायें।
संदर्भ पुस्तक- खोरठा भाषा का वैज्ञानिक अध्ययन- ए0 के0 झा एवं बी0 एन0 ओहदार
खोरठा सहित सदानि बेयाकरण- ए0 के0 झा
खोरठा भाषा गर्हन - कृष्ण चंद्र दास ’आला’
खोरठा भाषा एवं साहित्य (उद्भव एवं विकास)- बी0 एन0 ओहदार

ग्यारहवाँ पत्र: भारतीय साहित्य (Indian Literature) पूर्णांक- 100, समय 3 घंटे
अ) आधुनिक भारतीय साहितत्य- स्वतंत्रतापूर्व और स्वतंत्रयोत्तर गद्य-पद्य साहित्य का विकास, प्रमुख कवि-लेखक एवं उनकी कृतियाँ।
आ) भारतीय साहित्य और झारखण्डी साहित्य- आदान-प्रदान, स्थापत्य, प्रतृति, विचार आदि। (हिन्दी, बंगला, उड़ीया, असमिया, और मराठी के संदर्भ में।)

बारहवाँ पत्र: लोक साहित्य (Folk lore) पूर्णांक- 100, समय 3 घंटे
1 लोकवार्तिक अध्ययन की परम्परा, 2 लोक वार्त्ता में लोक साहित्य का अध्ययन, 3 लोक साहित्य और ज्ञान-विज्ञान की अन्य शाखाओं से सम्बन्ध, 4 लोक साहित्य की परिभाषा, व्याप्ति, स्वरूप, महत्व और प्रयोजन, 5 लोक साहित्य के विविध रूप और प्रकार- (क) लोकगीत (ख) लोकगाथा (ग) लोककथा (घ) लोक नाट्य (ङ) लोकोक्तियाँ एवं मुहावरे (च) पहेलियाँ मंत्र, 6 लोक साहित्य और शिष्ट साहित्य, 7 लोक साहित्य एवं संस्कृति।
इस पत्र के उत्तर हिन्दी, अंग्रेजी या किसी एक मानक भाषा में अपेक्षित होंगे

तेरहवाँ पत्र: अपनी भाषा का लोक साहित्य (Folk lore Lang.Group) पूर्णांक- 100, समय 3 घंटे
अंक विभाजन
(अ) आलोचनात्मक प्रश्न 3ग20 त्र 60
(आ) व्याख्यात्मक प्रश्न 4ग10 त्र 40
इस पत्र के उत्तर जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा में अपेक्षित होंगे।

संदर्भ पुस्तक- एक टोकी फूल -संपादक-ए0 के0झा
खोरठा लोकगीत: एक विश्लेषण- बी0 एन0 ओहदार (प्रकाश्य)
खोरठा लोक कथा - संगिया संपादन
खोरठा लोक साहित- संगिया संपादन, झा0 ज0जा0 क0 शोध संस्थान (राँची) प्रकाश्य।

चौदहवाँ पत्र: साहित्यिक निबन्ध (Literary Essay)
अ) जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा, व्याकरण और लिपि सम्बन्धी निबन्ध। आ) साहित्य, संस्कृति संबंधी निबंध।

संदर्भ पुस्तक- खोरठा निबंध- बी0 एन0 ओहदार, खोरठा काठें गइदेक खँड़ी- ए0 के0 झा, तितकी (अनियतकालिन पत्रिका), इंजोर (अनियतकालिन पत्रिका) संपादक-शांतिभारत/दिनेश दिनमणि, संपादक- धनंजय प्रसाद, लुआठी (खोरठा मासिक पत्रिका) संपादक- गिरिधारी गोस्वामी।

पंद्रहवाँ एवं सोलहवाँ पत्र: रचना एवं शोध
रचनात्मक लेखन -100
शोध प्रबंध - 100
पंद्रहवां पत्र (रचनात्मक लेखन) में किसी एक जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा में स्वरचित कविताएँ, कहानी, नाटक, व्यक्तिगत निबंध, उपन्यास आदि का संकलन अपेक्षित है। रचनात्मक लगभग 100 पृष्ठों का होना चाहिए।

सोलहवां पत्र (लघु शोध प्रबंध) हिन्दी, अंग्रेजी, बंगला, उड़ीया आदि किसी मानक भाषाओं में 100 पृष्ठों का होना चाहिए। इसमें 20-25 पृष्ठों का फील्ड रिपोर्ट भी शामिल है।

Current Cover

अंकः 1, वर्षः 2, सितम्बर 2010

Latest issue of LUATHI

Issue: 1, Volume: 2, September 2010

 

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खोरठा झारखंडेक गोटे उत्तरी छोटा नागपूर, संथाल परगना छाड़ा राँची, पलामुक हिस्सा में पसरल हे आर ई हिंयाक मूलवासी-आदीवासीक संपर्क भासा हे। एकर पढ़ाई एखन नवम कलास सें एम0 ए0 तक भइ रहल हे। एकर सें पी0 एच-डी0 डी0लीट्0 भइ रहल हे। एकर लइ जे0आर0एफ0 कइर रहल हथ।

 

झारखंडी भाषाओं मे से खोरठा ऐसी भाषा है जो समुद्र (फरक्का के पास) और दामोदर नदी से संबंध रखती है। साथ ही यही ऐसी अकेली झारखंडी भाषा है जिसका भाषा क्षेत्र विदेश (बंगला देश) से संबद्ध है।

 

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