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an effort of popular Khortha monthaly magazine "LUATHI"

खोरठा की लोकप्रिय मासिक पत्रिका "लुआठी" का विनम्र प्रयास

 

- आकाशखूंटी (संपादक, लुआठी)

 

खोरठा की इस ’साइट’ में आपका स्वागत है। आज इस इंटरनेट के युग में हर वर्ग का युजर अपनी पसंद की सूचना बेबसाइट पर खोजता है। खासकर आज का युवा वर्ग किसी भी प्रकार के सूचना के लिए सबसे पहले इंटरनेट का ही सहारा ले रहा है। ऐसे में उन लोगों को अब तक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था जो खोरठा भाषा-साहित्य संस्कृति से संबंधित सूचना या जानकारी चाह रहे थे। अभी खोरठा के नाम पर सर्च करने पर कुछ मामुली और अधुरी जानकारी के अलावे भद्दे और अश्लील विडियो एलबम ही मिल रहे थे। हमारी यह साइट उन युजर की आवश्यकताओं को ध्यान में रख कर तैयार की गई है, जो खोरठा भाषा, लिपि, उसके लोक साहित्य, शिष्ट साहित्य, खोरठा के साहित्यकार, खोरठा भाषा-साहित्य के क्षेत्र में कार्यरत महत्वपूर्ण व्यक्ति/संस्थाओं के बारे में अद्यतन जानकारी चाहते हैं। साथ ही खोरठा भाषा में अध्ययन करने वाले न केवल शोधार्थी वरन साधारण विद्यार्थी और वैसे लोगों को भी समुचित और पर्याप्त सूचना प्राप्त हो जो खोरठा भाषा में कैरियर की तलाश रहे हैं। इस साइट में खोरठा भाषा-साहित्य प्रेमियों के साथ खास कर खोरठा विद्यार्थीयों की आवश्यकता को ध्यान में रखा गया है। वे साधारण खोरठा भाषी छात्र और प्रतियोगी भी लाभान्वित होंगे जो किन्हीं प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल होने जा रहे हैं।

 

’लुआठी’ झारखंड से प्रकाशित सबसे लोकप्रिय मासिक खोरठा पत्रिका है जो खोरठा भाषा और साहित्य का प्रतिनिधित्व करती है। यह एक साथ साहित्य के सभी विधाओं में मौलिक सामग्री, छात्रोपयोगी लेख, लोक साहित्य और खोरठा भाषा से संबंधित महत्वपूर्ण गतिविधियों को प्रकाशित करती है। ’लुआठी’ में खोरठा के जाने-माने प्रतिष्ठित रचनाकारों, प्राध्यापकों, और शोधार्थीयों के लेख प्रकाशित होते रहते हैं। ’लुआठी’ को खोरठा भाषा-साहित्य का जिंदा दस्तावेज कहा जाय तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।

 

हमारी यह बेबसाइट ऐसी साइट नहीं है जो एक बार देख लिया तो फिर इसे दूबारा देखने की आवश्यकता नहीं है अथवा एक बार डाउन लोड कर लिया तो उनके लिए यह बेकार हो गया। असल में हमारी यह साइट नब्बे प्रतिशत ’इ-पत्रिका’ की तरह होगी जिसके पाठ्य सामग्री का अद्यतन अपडेट होता रहेगा और नवीन सूचनाएँ उपलब्ध होती रहेंगी। यह आपकी आवश्यकता भी है और हमारी मजबुरी भी। इतने छोटे साइट में हम सारी सामग्रीयों को एक साथ नहीं रख सकते और हमे हर एक निश्चित अवधि के बाद स्थायी महत्वपूर्ण सामग्रीयों को छोड़ बाकी सामग्रीयों को बदलते रहना पड़ेगा।

Current Cover

अंकः 1, वर्षः 2, सितम्बर 2010

Latest issue of LUATHI

Issue: 1, Volume: 2, September 2010

 

Check out the Promotions

खोरठा झारखंडेक गोटे उत्तरी छोटा नागपूर, संथाल परगना छाड़ा राँची, पलामुक हिस्सा में पसरल हे आर ई हिंयाक मूलवासी-आदीवासीक संपर्क भासा हे। एकर पढ़ाई एखन नवम कलास सें एम0 ए0 तक भइ रहल हे। एकर सें पी0 एच-डी0 डी0लीट्0 भइ रहल हे। एकर लइ जे0आर0एफ0 कइर रहल हथ।

 

झारखंडी भाषाओं मे से खोरठा ऐसी भाषा है जो समुद्र (फरक्का के पास) और दामोदर नदी से संबंध रखती है। साथ ही यही ऐसी अकेली झारखंडी भाषा है जिसका भाषा क्षेत्र विदेश (बंगला देश) से संबद्ध है।

 

आप सबसे एक अनुरोध

खोरठा डॉट इन 'लुआठी' पत्रिका का एक विनम्र प्रयास है। इस प्रयास को झारखंडी समुदायों, विशेषकर खोरठा भाषा-भाषी समुदाय के सक्रिय सहयोग और समर्थन की आवश्यकता है। खोरठा की एकमात्र नियमित पत्रिका ‘लुआठी’ महज पत्रिका नहीं है बल्कि यह झारखंड के खोरठा भाषा-साहित्य की प्रतिनिधि सांस्कृतिक पत्रिका है। आपसे आग्रह है, इस प्रयास को आगे बढ़ाइए। अपने विचारों, सुझावों ओर प्रतिक्रियाओं से हमें luathi@khortha.in पर जरूर अवगत कराइए।